श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 104: अर्जुनके द्वारा त्रिगर्तोंकी पराजय, कौरव-पाण्डव-सैनिकोंका घोर युद्ध, अभिमन्युसे चित्रसेनकी, द्रोणसे द्रुपदकी और भीमसेनसे बाह्लीककी पराजय तथा सात्यकि और भीष्मका युद्ध  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  6.104.23-24h 
द्रोणश्च द्रुपदं भित्त्वा शरै: संनतपर्वभि:॥ २३॥
सारथिं चास्य विव्याध त्वरमाण: पराक्रमी।
 
 
अनुवाद
वीर द्रोणाचार्य ने मुड़े हुए बाणों से द्रुपद को घायल करके बड़ी शीघ्रता से उसके सारथि को भी घायल कर दिया।
 
The valiant Dronacharya, having wounded Drupada with arrows having bent ends, also pierced his charioteer with great haste.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)