श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 104: अर्जुनके द्वारा त्रिगर्तोंकी पराजय, कौरव-पाण्डव-सैनिकोंका घोर युद्ध, अभिमन्युसे चित्रसेनकी, द्रोणसे द्रुपदकी और भीमसेनसे बाह्लीककी पराजय तथा सात्यकि और भीष्मका युद्ध  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  6.104.19 
आर्जुनिश्चित्रसेनेन विद्धो बहुभिराशुगै:।
अतिष्ठदाहवे शूर: किरन् बाणान् सहस्रश:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि चित्रसेन ने अर्जुनपुत्र अभिमन्यु को अनेक बाणों से घायल कर दिया था, फिर भी वह वीर योद्धा हजारों बाणों की वर्षा करता हुआ युद्धभूमि में डटा रहा॥19॥
 
Even though Chitrasena had wounded Abhimanyu, the son of Arjun, with many arrows, the valiant warrior remained firm on the battlefield, showering thousands of arrows.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)