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mahabharat 6.104.14: तत्पश्चात् लयबद्ध ध्वजाधारी वीर भीष्म ने अपने धनुषयुक्त बाणों द्वारा युद्धस्थल में पाण्डव सेना को आच्छादित कर दिया॥14॥   |   mahabharat अध्याय 6.104: अर्जुनके द्वारा त्रिगर्तोंकी पराजय, कौरव-पाण्डव-सैनिकोंका घोर युद्ध, अभिमन्युसे चित्रसेनकी, द्रोणसे द्रुपदकी और भीमसेनसे बाह्लीककी पराजय तथा सात्यकि और भीष्मका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 104: अर्जुनके द्वारा त्रिगर्तोंकी पराजय, कौरव-पाण्डव-सैनिकोंका घोर युद्ध, अभिमन्युसे चित्रसेनकी, द्रोणसे द्रुपदकी और भीमसेनसे बाह्लीककी पराजय तथा सात्यकि और भीष्मका युद्ध  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.104.14 
ततस्तालध्वज: शूर: पाण्डवानां वरूथिनीम्।
छादयामास समरे शरै: संनतपर्वभि:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् लयबद्ध ध्वजाधारी वीर भीष्म ने अपने धनुषयुक्त बाणों द्वारा युद्धस्थल में पाण्डव सेना को आच्छादित कर दिया॥14॥
 
Thereafter, Bhishma, the brave warrior with the rhythmic flag, covered the Pandava army in the battle with his bowed knotted arrows. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)