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mahabharat 6.104.1: संजय कहते हैं - हे राजन! सिंहरूपी अर्जुन ने अपने तीखे बाणों द्वारा सुशर्मा के अनुयायी राजाओं को यमलोक भेजना आरम्भ कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.104: अर्जुनके द्वारा त्रिगर्तोंकी पराजय, कौरव-पाण्डव-सैनिकोंका घोर युद्ध, अभिमन्युसे चित्रसेनकी, द्रोणसे द्रुपदकी और भीमसेनसे बाह्लीककी पराजय तथा सात्यकि और भीष्मका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 104: अर्जुनके द्वारा त्रिगर्तोंकी पराजय, कौरव-पाण्डव-सैनिकोंका घोर युद्ध, अभिमन्युसे चित्रसेनकी, द्रोणसे द्रुपदकी और भीमसेनसे बाह्लीककी पराजय तथा सात्यकि और भीष्मका युद्ध  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.104.1 
संजय उवाच
अर्जुनस्तान् नरव्याघ्र: सुशर्मानुचरान् नृपान्।
अनयत् प्रेतराजस्य सदनं सायकै: शितै:॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! सिंहरूपी अर्जुन ने अपने तीखे बाणों द्वारा सुशर्मा के अनुयायी राजाओं को यमलोक भेजना आरम्भ कर दिया।
 
Sanjaya says - O King! The lion-man Arjuna began sending the kings who were followers of Susharma to Yamaloka with his sharp arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)