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mahabharat 6.103.7: शिखण्डी ने भरतवंशी पितामह भीष्म को बींध डाला; परंतु मन में उसे स्त्री मानकर अपनी मर्यादा से विचलित न होने वाले भीष्म ने उस पर प्रहार नहीं किया॥7॥   |   mahabharat अध्याय 6.103: उभय पक्षकी सेनाओंका घमासान युद्ध और रक्तमयी रणनदीका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 103: उभय पक्षकी सेनाओंका घमासान युद्ध और रक्तमयी रणनदीका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.103.7 
शिखण्डी तं च विव्याध भरतानां पितामहम्।
स्त्रीमयं मनसा ध्यात्वा नास्मै प्राहरदच्युत:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
शिखण्डी ने भरतवंशी पितामह भीष्म को बींध डाला; परंतु मन में उसे स्त्री मानकर अपनी मर्यादा से विचलित न होने वाले भीष्म ने उस पर प्रहार नहीं किया॥7॥
 
Shikhandi pierced Bhishma, the grandfather of Bharatvanshi; But Bhishma, who did not deviate from his dignity considering her as a woman in his mind, did not attack her. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)