Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.103.21-23: प्रजानाथ! अनेक सारथि अपने रथों से वंचित हो गए थे। वे कवच, कुण्डल और पगड़ियाँ धारण किए हुए अत्यंत तेजस्वी लग रहे थे। उन सभी के गले में स्वर्ण पदक और भुजाओं में बाजूबंद थे। वे देवताओं के पुत्रों के समान सुन्दर और युद्ध में इंद्र के समान पराक्रमी थे। वे धन में कुबेर से और बुद्धि में बृहस्पति से भी श्रेष्ठ थे। ऐसे पराक्रमी योद्धा, जो जगत के स्वामी थे, रथहीन होकर अशिक्षितों की भाँति इधर-उधर भागते दिखाई दे रहे थे। | mahabharat अध्याय 6.103: उभय पक्षकी सेनाओंका घमासान युद्ध और रक्तमयी रणनदीका वर्णन । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रजानाथ! अनेक सारथि अपने रथों से वंचित हो गए थे। वे कवच, कुण्डल और पगड़ियाँ धारण किए हुए अत्यंत तेजस्वी लग रहे थे। उन सभी के गले में स्वर्ण पदक और भुजाओं में बाजूबंद थे। वे देवताओं के पुत्रों के समान सुन्दर और युद्ध में इंद्र के समान पराक्रमी थे। वे धन में कुबेर से और बुद्धि में बृहस्पति से भी श्रेष्ठ थे। ऐसे पराक्रमी योद्धा, जो जगत के स्वामी थे, रथहीन होकर अशिक्षितों की भाँति इधर-उधर भागते दिखाई दे रहे थे।
Prajanath! Many charioteers were deprived of their chariots. They looked very radiant wearing armour, earrings and turbans. All of them wore golden medals around their necks and armlets on their arms. They looked as beautiful as the sons of the gods and were as valiant as Indra in battle. They were even better than Kubera in wealth and Brihaspati in wisdom. Such valiant warriors, the lords of the world, were seen running here and there like uneducated people, being without chariots.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥