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mahabharat 6.102.8: हे भरतपुत्र! हे राजन! तब युद्ध में द्रोणाचार्य ने शीघ्रतापूर्वक अर्जुन को मुड़ी हुई गांठों वाले बाणों से ढक दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.102: द्रोणाचार्य और सुशर्माके साथ अर्जुनका युद्ध तथा भीमसेनके द्वारा गजसेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 102: द्रोणाचार्य और सुशर्माके साथ अर्जुनका युद्ध तथा भीमसेनके द्वारा गजसेनाका संहार  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.102.8 
ततोऽर्जुनं रणे द्रोण: शरै: संनतपर्वभि:।
छादयामास राजेन्द्र नचिरादेव भारत॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे भरतपुत्र! हे राजन! तब युद्ध में द्रोणाचार्य ने शीघ्रतापूर्वक अर्जुन को मुड़ी हुई गांठों वाले बाणों से ढक दिया।
 
O son of Bharata! O King! Then in the battle, Dronacharya quickly covered Arjuna with arrows having bent knots. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)