श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 102: द्रोणाचार्य और सुशर्माके साथ अर्जुनका युद्ध तथा भीमसेनके द्वारा गजसेनाका संहार  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.102.7 
शरवृष्टॺा पुन: पार्थश्छादयामास तं रणे।
स प्रजज्वाल रोषेण गहनेऽग्निरिवोर्जित:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
तब अर्जुन ने पुनः युद्धभूमि में अपने बाणों की वर्षा से द्रोणाचार्य को ढक दिया। यह देखकर वे क्रोध से ऐसे जलने लगे मानो वन में दावानल लग गया हो।
 
Then Arjuna again covered Dronacharya with a shower of his arrows on the battlefield. Seeing this, he burned with anger as if a forest fire had broken out in the forest. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)