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mahabharat 6.102.5: महाराज! क्षत्रिय युद्धभूमि में किसी को नहीं छोड़ते। वे अपने पिता और भाइयों से भी अविनम्रतापूर्वक युद्ध करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 6.102: द्रोणाचार्य और सुशर्माके साथ अर्जुनका युद्ध तथा भीमसेनके द्वारा गजसेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.102.5 
न क्षत्रिया रणे राजन् वर्जयन्ति परस्परम्।
निर्मर्यादं हि युध्यन्ते पितृभिर्भ्रातृभि: सह॥ ५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! क्षत्रिय युद्धभूमि में किसी को नहीं छोड़ते। वे अपने पिता और भाइयों से भी अविनम्रतापूर्वक युद्ध करते हैं।
 
King! The Kshatriyas do not spare anyone in the battlefield. They fight with their fathers and brothers without any decorum. 5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)