Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.102.35-36: उसने एक हाथी का दाँत पकड़कर उखाड़ लिया और उसे दंतहीन कर दिया। फिर उसी दाँत से उसके माथे पर प्रहार किया और युद्धभूमि में उसे ऐसे मार डाला जैसे यमराज दंड धारण किए हुए हों।   |   mahabharat अध्याय 6.102: द्रोणाचार्य और सुशर्माके साथ अर्जुनका युद्ध तथा भीमसेनके द्वारा गजसेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 102: द्रोणाचार्य और सुशर्माके साथ अर्जुनका युद्ध तथा भीमसेनके द्वारा गजसेनाका संहार  »  श्लोक 35-36
 
 
श्लोक  6.102.35-36 
विषाणे दन्तिनं गृह्य निर्विषाणमथाकरोत्॥ ३५॥
विषाणेन च तेनैव कुम्भेऽभ्याहत्य दन्तिनम्।
पातयामास समरे दण्डहस्त इवान्तक:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
उसने एक हाथी का दाँत पकड़कर उखाड़ लिया और उसे दंतहीन कर दिया। फिर उसी दाँत से उसके माथे पर प्रहार किया और युद्धभूमि में उसे ऐसे मार डाला जैसे यमराज दंड धारण किए हुए हों।
 
He grabbed the tooth of an elephant and pulled it out and made that elephant toothless. Then he hit its forehead with the same tooth and killed it in the battlefield like Yamaraja holding a stick.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)