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श्लोक  6.102.31-32h 
गजमध्यमनुप्राप्त: पाण्डव: स व्यराजत॥ ३१॥
मेघजालस्य महतो यथा मध्यगतो रवि:।
 
 
अनुवाद
उस गजसेना के मध्य में लेटे हुए पाण्डवपुत्र भीमसेन विशाल मेघ के मध्य स्थित सूर्य के समान चमकने लगे।
 
Lying in the midst of that elephant army, Pandava's son Bhimasena began to shine like the Sun situated in the midst of a huge cloud. 31 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)