तावुभौ रथिनौ संख्ये हृष्टौ सिंहाविवोत्कटौ।
कथं समीयतुर्यत्तौ भारद्वाजधनंजयौ॥ ३॥
अनुवाद
वे दोनों महारथी द्रोणाचार्य और धनंजय उस दिन युद्धस्थल में दो भयंकर सिंहों के समान हर्ष और उत्साह से भरे हुए किस प्रकार परस्पर युद्ध कर रहे थे?॥3॥
How did those two charioteers, Dronacharya and Dhananjaya, fight with each other that day in the battlefield, filled with joy and enthusiasm like two fierce lions?॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥