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mahabharat 6.102.20-21h: महाराज! तत्पश्चात् द्रोणाचार्य ने उस अत्यन्त भयंकर वायु अस्त्र को देखकर उसे रोकने के लिए भयंकर पर्वतास्त्र का प्रयोग किया। 20 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.102: द्रोणाचार्य और सुशर्माके साथ अर्जुनका युद्ध तथा भीमसेनके द्वारा गजसेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 102: द्रोणाचार्य और सुशर्माके साथ अर्जुनका युद्ध तथा भीमसेनके द्वारा गजसेनाका संहार  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  6.102.20-21h 
ततो द्रोणोऽभिवीक्ष्यैव वायव्यास्त्रं सुदारुणम्॥ २०॥
शैलमन्यन्महाराज घोरमस्त्रं मुमोच ह।
 
 
अनुवाद
महाराज! तत्पश्चात् द्रोणाचार्य ने उस अत्यन्त भयंकर वायु अस्त्र को देखकर उसे रोकने के लिए भयंकर पर्वतास्त्र का प्रयोग किया। 20 1/2॥
 
Maharaj! Thereafter, Dronacharya, seeing the extremely dangerous air weapon, used the terrible Parvatastra to ward off it. 20 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)