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mahabharat 6.102.12: हे प्रभु! वे बाण कुन्तीकुमार अर्जुन पर सब ओर से पड़कर उसके शरीर में धँसने लगे, मानो स्वादिष्ट फलों के भार से झुके हुए वृक्ष पर सब ओर से पक्षी गिर रहे हों॥12॥   |   mahabharat अध्याय 6.102: द्रोणाचार्य और सुशर्माके साथ अर्जुनका युद्ध तथा भीमसेनके द्वारा गजसेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.102.12 
ते शरा: प्राप्य कौन्तेयं समन्ताद् विविशु: प्रभो।
फलभारनतं यद्वत् स्वादुवृक्षं विहङ्गमा:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! वे बाण कुन्तीकुमार अर्जुन पर सब ओर से पड़कर उसके शरीर में धँसने लगे, मानो स्वादिष्ट फलों के भार से झुके हुए वृक्ष पर सब ओर से पक्षी गिर रहे हों॥12॥
 
Lord! Those arrows fell on Kuntikumar Arjun from all sides and started sinking into his body, as if birds were falling from all sides on a tree bent under the weight of delicious fruits. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)