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mahabharat 6.101.56: राजन! उस महायुद्ध में सात्यकि द्वारा घायल किये गये अपने पुत्र की रक्षा के लिए आचार्य ने उसे तीक्ष्ण बाण से घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.101: अभिमन्युके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, अर्जुनके साथ भीष्मका तथा कृपाचार्य, अश्वत्थामा और द्रोणाचार्यके साथ सात्यकिका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 101: अभिमन्युके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, अर्जुनके साथ भीष्मका तथा कृपाचार्य, अश्वत्थामा और द्रोणाचार्यके साथ सात्यकिका युद्ध  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  6.101.56 
विव्याध च सुतीक्ष्णेन पृषत्केन महामृधे।
परीप्सन् स्वसुतं राजन् वार्ष्णेयेनाभिपीडितम्॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
राजन! उस महायुद्ध में सात्यकि द्वारा घायल किये गये अपने पुत्र की रक्षा के लिए आचार्य ने उसे तीक्ष्ण बाण से घायल कर दिया।
 
King! In that great war, to protect his son who was injured by Satyaki, the Acharya wounded him with a sharp arrow. 56.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)