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mahabharat 6.101.55: जैसे राहु चन्द्रमा को ग्रस लेता है, वैसे ही महाबली द्रोणाचार्य ने अपने पुत्र को सात्यकि द्वारा ग्रसित देखकर उस पर आक्रमण किया ॥55॥   |   mahabharat अध्याय 6.101: अभिमन्युके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, अर्जुनके साथ भीष्मका तथा कृपाचार्य, अश्वत्थामा और द्रोणाचार्यके साथ सात्यकिका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 101: अभिमन्युके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, अर्जुनके साथ भीष्मका तथा कृपाचार्य, अश्वत्थामा और द्रोणाचार्यके साथ सात्यकिका युद्ध  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  6.101.55 
दृष्ट्वा पुत्रं च तं ग्रस्तं राहुणेव निशाकरम्।
अभ्यद्रवत शैनेयं भारद्वाज: प्रतापवान्॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
जैसे राहु चन्द्रमा को ग्रस लेता है, वैसे ही महाबली द्रोणाचार्य ने अपने पुत्र को सात्यकि द्वारा ग्रसित देखकर उस पर आक्रमण किया ॥55॥
 
Just as Rahu engulfs the Moon, so the mighty Dronacharya, seeing his son eclipsed by Satyaki, attacked him. ॥ 55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)