Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.101.53: तदनन्तर शत्रु योद्धाओं का नाश करने वाले युयुधान ने मेघों से मुक्त हुए सूर्य के समान द्रोणपुत्र को कष्ट देना आरम्भ कर दिया ॥53॥   |   mahabharat अध्याय 6.101: अभिमन्युके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, अर्जुनके साथ भीष्मका तथा कृपाचार्य, अश्वत्थामा और द्रोणाचार्यके साथ सात्यकिका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 101: अभिमन्युके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, अर्जुनके साथ भीष्मका तथा कृपाचार्य, अश्वत्थामा और द्रोणाचार्यके साथ सात्यकिका युद्ध  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  6.101.53 
तापयामास च द्रौणिं शैनेय: परवीरहा।
विमुक्तो मेघजालेन यथैव तपनस्तथा॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर शत्रु योद्धाओं का नाश करने वाले युयुधान ने मेघों से मुक्त हुए सूर्य के समान द्रोणपुत्र को कष्ट देना आरम्भ कर दिया ॥53॥
 
Then Yuyudhana, the destroyer of enemy warriors, started tormenting Drona's son like the sun freed from the clouds. 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)