vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 6: भीष्म पर्व
»
अध्याय 101: अभिमन्युके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, अर्जुनके साथ भीष्मका तथा कृपाचार्य, अश्वत्थामा और द्रोणाचार्यके साथ सात्यकिका युद्ध
»
श्लोक 52
श्लोक
6.101.52
सात्यकोऽपि महाराज शरजालं निहत्य तत्।
द्रौणिमभ्यकिरत् तूर्णं शरजालैरनेकधा॥ ५२॥
अनुवाद
हे नरेश! उस समय सात्यकि ने भी उस बाण समूह को नष्ट करके तुरन्त ही अश्वत्थामा पर अनेक प्रकार के बाणों का जाल बिछा दिया।
O lord of men! At that time Satyaki too, having destroyed that group of arrows, immediately spread a net of many kinds of arrows over Ashwatthama. 52.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas