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mahabharat 6.101.52: हे नरेश! उस समय सात्यकि ने भी उस बाण समूह को नष्ट करके तुरन्त ही अश्वत्थामा पर अनेक प्रकार के बाणों का जाल बिछा दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.101: अभिमन्युके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, अर्जुनके साथ भीष्मका तथा कृपाचार्य, अश्वत्थामा और द्रोणाचार्यके साथ सात्यकिका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 101: अभिमन्युके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, अर्जुनके साथ भीष्मका तथा कृपाचार्य, अश्वत्थामा और द्रोणाचार्यके साथ सात्यकिका युद्ध  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  6.101.52 
सात्यकोऽपि महाराज शरजालं निहत्य तत्।
द्रौणिमभ्यकिरत् तूर्णं शरजालैरनेकधा॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
हे नरेश! उस समय सात्यकि ने भी उस बाण समूह को नष्ट करके तुरन्त ही अश्वत्थामा पर अनेक प्रकार के बाणों का जाल बिछा दिया।
 
O lord of men! At that time Satyaki too, having destroyed that group of arrows, immediately spread a net of many kinds of arrows over Ashwatthama. 52.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)