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mahabharat 6.101.48: तत्पश्चात् द्रोण के प्रतापी पुत्र को पुनः होश आया और उन्होंने क्रोधित होकर युद्धभूमि में अपनी तलवार से सात्यकि को घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.101: अभिमन्युके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, अर्जुनके साथ भीष्मका तथा कृपाचार्य, अश्वत्थामा और द्रोणाचार्यके साथ सात्यकिका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 101: अभिमन्युके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, अर्जुनके साथ भीष्मका तथा कृपाचार्य, अश्वत्थामा और द्रोणाचार्यके साथ सात्यकिका युद्ध  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  6.101.48 
प्रतिलभ्य तत: संज्ञां द्रोणपुत्र: प्रतापवान्।
वार्ष्णेयं समरे क्रुद्धो नाराचेन समार्पयत्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् द्रोण के प्रतापी पुत्र को पुनः होश आया और उन्होंने क्रोधित होकर युद्धभूमि में अपनी तलवार से सात्यकि को घायल कर दिया।
 
After that, the glorious son of Drona regained consciousness and became angry and injured Satyaki with his sword in the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)