सोऽन्यत् कार्मुकमादाय शत्रुघ्नं भारसाधनम्।
द्रौणिं षष्टॺा महाराज बाह्वोरुरसि चार्पयत्॥ ४६॥
अनुवाद
महाराज ! तब सात्यकि ने भारी अस्त्रों को संभालने में समर्थ तथा शत्रुओं का नाश करने वाला दूसरा धनुष हाथ में लेकर साठ बाणों द्वारा अश्वत्थामा की भुजाओं और छाती को बींध डाला ॥46॥
Maharaj! Then Satyaki took in his hand the second bow capable of handling heavy weapons and destroyer of enemies and pierced the arms and chest of Ashwatthama with sixty arrows. 46॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥