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mahabharat 6.101.44: तदनन्तर रथियों में श्रेष्ठ सत्य ने कृपाचार्य को पीछे छोड़कर युद्धस्थल में अश्वत्थामा पर उसी प्रकार आक्रमण किया, जैसे राहु आकाश में चन्द्रमा पर आक्रमण करता है॥44॥   |   mahabharat अध्याय 6.101: अभिमन्युके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, अर्जुनके साथ भीष्मका तथा कृपाचार्य, अश्वत्थामा और द्रोणाचार्यके साथ सात्यकिका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 101: अभिमन्युके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, अर्जुनके साथ भीष्मका तथा कृपाचार्य, अश्वत्थामा और द्रोणाचार्यके साथ सात्यकिका युद्ध  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  6.101.44 
समुत्सृज्याथ शैनेयो गौतमं रथिनां वर:।
अभ्यद्रवद् रणे द्रौणिं राहु: खे शशिनं यथा॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर रथियों में श्रेष्ठ सत्य ने कृपाचार्य को पीछे छोड़कर युद्धस्थल में अश्वत्थामा पर उसी प्रकार आक्रमण किया, जैसे राहु आकाश में चन्द्रमा पर आक्रमण करता है॥44॥
 
Then Satya, the best among the charioteers, leaving Kripacharya behind, attacked Ashvatthama in the battlefield just as Rahu attacks the moon in the sky. 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)