श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 101: अभिमन्युके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, अर्जुनके साथ भीष्मका तथा कृपाचार्य, अश्वत्थामा और द्रोणाचार्यके साथ सात्यकिका युद्ध  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  6.101.42 
शैनेयोऽपि तत: क्रुद्धश्चापमानम्य वेगवान्।
गौतमान्तकरं तूर्णं समाधत्त शिलीमुखम्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
तब महाबली सात्यकि ने भी क्रोध में भरकर अपना धनुष चढ़ाया और तुरन्त ही उस पर कृपाचार्य को मारने वाला बाण चढ़ाया।
 
Then the mighty Satyaki also, filled with anger, bent his bow and immediately placed on it an arrow that would kill Krupacharya. 42.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)