vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 6: भीष्म पर्व
»
अध्याय 101: अभिमन्युके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, अर्जुनके साथ भीष्मका तथा कृपाचार्य, अश्वत्थामा और द्रोणाचार्यके साथ सात्यकिका युद्ध
»
श्लोक 41
श्लोक
6.101.41
गौतमोऽपि त्वरायुक्तो माधवं नवभि: शरै:।
हृदि विव्याध संक्रुद्ध: कङ्कपत्रपरिच्छदै:॥ ४१॥
अनुवाद
यह देखकर कृपाचार्य अत्यन्त क्रोधित हो गए और उन्होंने बड़ी शीघ्रता से सात्यकि की छाती पर कंकपात्र से विभूषित नौ बाण मारकर उसे घायल कर दिया ॥ 41॥
Seeing this, Krupacharya became very angry and in great haste he injured Satyaki by shooting nine arrows decorated with Kankapatra on his chest. ॥ 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×