श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 101: अभिमन्युके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, अर्जुनके साथ भीष्मका तथा कृपाचार्य, अश्वत्थामा और द्रोणाचार्यके साथ सात्यकिका युद्ध  »  श्लोक 33-34
 
 
श्लोक  6.101.33-34 
स तेषां रथिनां वीर: पितुस्तुल्यपराक्रम:।
सदृशो वासुदेवस्य विक्रमेण बलेन च॥ ३३॥
उभयो: सदृशं कर्म स पितुर्मातुलस्य च।
रणे बहुविधं चक्रे सर्वशस्त्रभृतां वर:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
वीर अभिमन्यु अपने पिता अर्जुन के समान ही वीर था । बल और पराक्रम में वसुदेवनन्दन श्रीकृष्ण के समान था । समस्त शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ उस वीर ने अपने पिता और मामा दोनों के समान ही कौरव महारथियों के साथ रणभूमि में अनेक पराक्रम किये । 33-34॥
 
Brave Abhimanyu was as brave as his father Arjun. Vasudevanandan resembled Shri Krishna in strength and power. That hero, the best among all the armed men, performed many heroic deeds in the battlefield with those Kaurava charioteers, just like both his father and maternal uncle. 33-34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)