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mahabharat 6.101.26-27h: इस प्रकार महापराक्रमी पुरुषों में श्रेष्ठ अभिमन्यु ने उस दुष्ट राक्षस की माया को नष्ट कर दिया और अत्यन्त कुपित होकर युद्धस्थल में उसे मुड़ी हुई गांठों वाले बाणों से ढक दिया ॥26 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.101: अभिमन्युके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, अर्जुनके साथ भीष्मका तथा कृपाचार्य, अश्वत्थामा और द्रोणाचार्यके साथ सात्यकिका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 101: अभिमन्युके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, अर्जुनके साथ भीष्मका तथा कृपाचार्य, अश्वत्थामा और द्रोणाचार्यके साथ सात्यकिका युद्ध  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  6.101.26-27h 
तां चाभिजघ्निवान् मायां राक्षसस्य दुरात्मन:।
संक्रुद्धश्च महावीर्यो राक्षसेन्द्रं नरोत्तम:॥ २६॥
छादयामास समरे शरै: संनतपर्वभि:।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार महापराक्रमी पुरुषों में श्रेष्ठ अभिमन्यु ने उस दुष्ट राक्षस की माया को नष्ट कर दिया और अत्यन्त कुपित होकर युद्धस्थल में उसे मुड़ी हुई गांठों वाले बाणों से ढक दिया ॥26 1/2॥
 
In this way, Abhimanyu, the best of men of great valour, destroyed the illusion of that evil demon and, being extremely enraged, covered him in the battlefield with arrows having bent knots. 26 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)