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mahabharat 6.101.24-25: इस भयंकर एवं महान् अंधकार को देखकर कुरुकुल को प्रसन्न करने वाले अभिमन्यु ने अत्यन्त भयंकर भास्करास्त्र प्रकट किया। राजन! इससे सम्पूर्ण जगत् में प्रकाश फैल गया। 24-25॥   |   mahabharat अध्याय 6.101: अभिमन्युके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, अर्जुनके साथ भीष्मका तथा कृपाचार्य, अश्वत्थामा और द्रोणाचार्यके साथ सात्यकिका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 101: अभिमन्युके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, अर्जुनके साथ भीष्मका तथा कृपाचार्य, अश्वत्थामा और द्रोणाचार्यके साथ सात्यकिका युद्ध  »  श्लोक 24-25
 
 
श्लोक  6.101.24-25 
अभिमन्युश्च तद् दृष्ट्वा घोररूपं महत्तम:॥ २४॥
प्रादुश्चक्रेऽस्त्रमत्युग्रं भास्करं कुरुनन्दन:।
तत: प्रकाशमभवज्जगत् सर्वं महीपते॥ २५॥
 
 
अनुवाद
इस भयंकर एवं महान् अंधकार को देखकर कुरुकुल को प्रसन्न करने वाले अभिमन्यु ने अत्यन्त भयंकर भास्करास्त्र प्रकट किया। राजन! इससे सम्पूर्ण जगत् में प्रकाश फैल गया। 24-25॥
 
Seeing this terrible and great darkness, Abhimanyu, who made Kurukula happy, revealed the very fierce Bhaskastra. Rajan! Due to this, light spread throughout the world. 24-25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)