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mahabharat 6.101.22-23h: तब उस राक्षस ने युद्धस्थल में शत्रुओं से पीड़ित होकर विमुख होकर अपनी (अंधकारमय) तामसी महामाया प्रकट की, जो शत्रुओं को भी पीड़ा देती है।   |   mahabharat अध्याय 6.101: अभिमन्युके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, अर्जुनके साथ भीष्मका तथा कृपाचार्य, अश्वत्थामा और द्रोणाचार्यके साथ सात्यकिका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 101: अभिमन्युके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, अर्जुनके साथ भीष्मका तथा कृपाचार्य, अश्वत्थामा और द्रोणाचार्यके साथ सात्यकिका युद्ध  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  6.101.22-23h 
विमुखं च ततो रक्षो वध्यमानं रणेऽरिणा॥ २२॥
प्रादुश्चक्रे महामायां तामसीं परतापनाम्।
 
 
अनुवाद
तब उस राक्षस ने युद्धस्थल में शत्रुओं से पीड़ित होकर विमुख होकर अपनी (अंधकारमय) तामसी महामाया प्रकट की, जो शत्रुओं को भी पीड़ा देती है।
 
Then, the demon, tormented by the enemy in the battle-field and turned away, manifested his (dark) Tamasi Mahamaya (great illusion), who torments the enemies. 22 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)