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mahabharat 6.101.18-19h: महाराज! तब कुपित अलम्बुष ने देवराज इन्द्र के समान पराक्रमी अर्जुनपुत्र को पंखयुक्त बाणों से आच्छादित कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.101: अभिमन्युके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, अर्जुनके साथ भीष्मका तथा कृपाचार्य, अश्वत्थामा और द्रोणाचार्यके साथ सात्यकिका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 101: अभिमन्युके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, अर्जुनके साथ भीष्मका तथा कृपाचार्य, अश्वत्थामा और द्रोणाचार्यके साथ सात्यकिका युद्ध  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  6.101.18-19h 
तत: क्रुद्धो महाराज आर्ष्यशृङ्गिरमर्षण:॥ १८॥
महेन्द्रप्रतिमं कार्ष्णिं छादयामास पत्रिभि:।
 
 
अनुवाद
महाराज! तब कुपित अलम्बुष ने देवराज इन्द्र के समान पराक्रमी अर्जुनपुत्र को पंखयुक्त बाणों से आच्छादित कर दिया।
 
Maharaj! Then the enraged Alambusha covered Arjuna's son, who was as valiant as Devaraj Indra, with feathered arrows. 18 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)