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mahabharat 6.100.50: उन पाँचों भाइयों को युद्धभूमि में दुष्टात्मा राक्षस द्वारा अत्यन्त कष्ट पाते देख अर्जुनपुत्र अभिमन्यु ने पुनः उन पर आक्रमण किया।   |   mahabharat अध्याय 6.100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  6.100.50 
तानर्दितान् रणे तेन राक्षसेन दुरात्मना।
दृष्ट्वार्जुनसुत: संख्ये राक्षसं समुपाद्रवत्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
उन पाँचों भाइयों को युद्धभूमि में दुष्टात्मा राक्षस द्वारा अत्यन्त कष्ट पाते देख अर्जुनपुत्र अभिमन्यु ने पुनः उन पर आक्रमण किया।
 
Seeing those five brothers being terribly tormented on the battlefield by the evil-minded demon, Abhimanyu, the son of Arjun, attacked him again. 50.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)