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mahabharat 6.100.49: रात्रिचर अलम्बुष ने उन महान धनुर्धर वीरों पर बड़े वेग से आक्रमण किया, तथा उन्हें रथहीन करके युद्ध में मार डालने की इच्छा से उन पर आक्रमण किया ॥49॥   |   mahabharat अध्याय 6.100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  6.100.49 
विरथांश्च महेष्वासान् कृत्वा तत्र स राक्षस:।
अभिदुद्राव वेगेन हन्तुकामो निशाचर:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
रात्रिचर अलम्बुष ने उन महान धनुर्धर वीरों पर बड़े वेग से आक्रमण किया, तथा उन्हें रथहीन करके युद्ध में मार डालने की इच्छा से उन पर आक्रमण किया ॥49॥
 
The nocturnal Alambusha attacked those great archer heroes with great speed, desiring to make them chariotless and kill them in the battle. 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)