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mahabharat 6.100.47: तब उस महाबली राक्षस ने क्रोध और उतावलेपन से भरकर उन पाँचों महाहृदयी भाइयों के घोड़ों और सारथियों को मार डाला।   |   mahabharat अध्याय 6.100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  6.100.47 
त्वरमाण: सुसंरब्धो हयांस्तेषां महात्मनाम्।
जघान राक्षस: क्रुद्ध: सारथींश्च महाबल:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
तब उस महाबली राक्षस ने क्रोध और उतावलेपन से भरकर उन पाँचों महाहृदयी भाइयों के घोड़ों और सारथियों को मार डाला।
 
Then that mighty Rakshasa, filled with anger and haste, in anger killed the horses and charioteers of those five great-hearted brothers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)