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mahabharat 6.100.46: तत्पश्चात् महारथी अलम्बुष ने रथ के आसन पर बैठकर मुस्कराते हुए नृत्य करते हुए उन सभी को पाँच-पाँच बाणों से घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  6.100.46 
एकैकं पञ्चभिर्बाणैराजघान स्मयन्निव।
अलम्बुषो रथोपस्थे नृत्यन्निव महारथ:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महारथी अलम्बुष ने रथ के आसन पर बैठकर मुस्कराते हुए नृत्य करते हुए उन सभी को पाँच-पाँच बाणों से घायल कर दिया।
 
Thereafter, the great car-warrior Alambusha, smilingly dancing in the seat of the chariot, wounded each of them with five arrows each.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)