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mahabharat 6.100.43: राजा ! उन भयंकर बाणों से बुरी तरह घायल हुआ अलम्बुष कुपित सर्पों के समान क्रोध से भर गया, मानो अंकुश से टूटे हुए राजहाथी हों ॥ 43॥   |   mahabharat अध्याय 6.100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  6.100.43 
स निर्भिन्न: शरैर्घोरैर्भुजगै: कोपितैरिव।
अलम्बुषो भृशं राजन् नागेन्द्र इव चुक्रुधे॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
राजा ! उन भयंकर बाणों से बुरी तरह घायल हुआ अलम्बुष कुपित सर्पों के समान क्रोध से भर गया, मानो अंकुश से टूटे हुए राजहाथी हों ॥ 43॥
 
King! Alambusha, badly wounded by those fierce arrows, like enraged serpents, became enraged like a king elephant broken by its goad. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)