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mahabharat 6.100.39: तत्पश्चात् महाबली प्रतिविन्ध्य ने अपने तीव्र गति वाले, तीक्ष्ण, पूर्णतया लोहे के बने हुए, अमोघ धार वाले बाणों द्वारा उस राक्षस को घायल कर दिया॥39॥   |   mahabharat अध्याय 6.100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  6.100.39 
प्रतिविन्ध्यस्ततो रक्षो बिभेद निशितै: शरै:।
सर्वपारशवैस्तूर्णैरकुण्ठाग्रैर्महाबल:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महाबली प्रतिविन्ध्य ने अपने तीव्र गति वाले, तीक्ष्ण, पूर्णतया लोहे के बने हुए, अमोघ धार वाले बाणों द्वारा उस राक्षस को घायल कर दिया॥39॥
 
After that, the mighty Prativindhya pierced that demon with his fast-moving and sharp arrows made entirely of iron and having an unrelenting edge. 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)