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mahabharat 6.100.37: द्रौपदी के पाँचों पुत्र महान धनुर्धर और आक्रमण में कुशल थे। क्रोधित होकर उन्होंने युद्धभूमि में उस राक्षस पर ऐसे आक्रमण किया मानो पाँच ग्रह सूर्यदेव पर आक्रमण कर रहे हों।   |   mahabharat अध्याय 6.100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.100.37 
ते तु क्रुद्धा महेष्वासा द्रौपदेया: प्रहारिण:।
राक्षसं दुद्रुवु: संख्ये ग्रहा: पञ्च रविं यथा॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
द्रौपदी के पाँचों पुत्र महान धनुर्धर और आक्रमण में कुशल थे। क्रोधित होकर उन्होंने युद्धभूमि में उस राक्षस पर ऐसे आक्रमण किया मानो पाँच ग्रह सूर्यदेव पर आक्रमण कर रहे हों।
 
Draupadi's five sons were great archers and skilled in attacking. Enraged, they attacked the demon on the battlefield as if five planets were attacking the Sun God.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)