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mahabharat 6.100.34: उस समय राक्षस ने अपना पराक्रम दिखाते हुए युद्धभूमि में हजारों बाणों से विशाल पाण्डव सेना को भगाना आरम्भ कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  6.100.34 
तत: शरसहस्रैस्तां पाण्डवानां महाचमूम्।
व्यद्रावयद् रणे रक्षो दर्शयन् स्वपराक्रमम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
उस समय राक्षस ने अपना पराक्रम दिखाते हुए युद्धभूमि में हजारों बाणों से विशाल पाण्डव सेना को भगाना आरम्भ कर दिया।
 
At that time the Rakshasa, displaying his valour, began to chase away the huge Pandava army with thousands of arrows on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)