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mahabharat 6.100.31: तदनन्तर वह राक्षस क्रोध में भरकर युद्ध में अभिमन्यु के पास पहुँचा और पास खड़ी उसकी सेना को भगाने लगा ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 6.100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  6.100.31 
तत: स राक्षस: क्रुद्ध: सम्प्राप्यैवार्जुनिं रणे।
नातिदूरे स्थितां तस्य द्रावयामास वै चमूम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर वह राक्षस क्रोध में भरकर युद्ध में अभिमन्यु के पास पहुँचा और पास खड़ी उसकी सेना को भगाने लगा ॥31॥
 
Thereafter the Rakshasa filled with anger approached Abhimanyu in the battle and began to chase away his army which was standing nearby. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)