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mahabharat 6.100.30: अभिमन्यु हर्ष और उत्साह से भरकर, हाथ में धनुष-बाण लेकर, रथ के आसन पर बैठकर नाचता हुआ राक्षस की ओर दौड़ा।   |   mahabharat अध्याय 6.100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  6.100.30 
कार्ष्णिश्चापि मुदा युक्त: प्रगृह्य सशरं धनु:।
नृत्यन्निव रथोपस्थे तद् रक्ष: समुपाद्रवत्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
अभिमन्यु हर्ष और उत्साह से भरकर, हाथ में धनुष-बाण लेकर, रथ के आसन पर बैठकर नाचता हुआ राक्षस की ओर दौड़ा।
 
Abhimanyu, filled with joy and enthusiasm, with bow and arrow in his hands, ran towards the demon, dancing in the seat of the chariot. 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)