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mahabharat 6.100.20: जैसे इंद्र ने मयासुर को जीत लिया था, वैसे ही अभिमन्यु ने उस विशाल सेना को भगाकर और रथियों को कंपाकर अपने मित्रों को प्रसन्न किया ॥20॥   |   mahabharat अध्याय 6.100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.100.20 
द्रावयित्वा महासैन्यं कम्पयित्वा महारथान्।
नन्दयामास सुहृदो मयं जित्वेव वासव:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जैसे इंद्र ने मयासुर को जीत लिया था, वैसे ही अभिमन्यु ने उस विशाल सेना को भगाकर और रथियों को कंपाकर अपने मित्रों को प्रसन्न किया ॥20॥
 
Like Indra who conquered Mayasur, Abhimanyu made his friends happy by driving away that huge army and making the charioteers tremble. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)