Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.100.2-3: जैसे बादल जल की धारा बरसाता है, उसी प्रकार वह बाणों की वर्षा कर रहा था। जैसे वराह रूपधारी भगवान विष्णु समुद्र में प्रविष्ट हुए थे, उसी प्रकार युद्ध में कुपित हुए सुभद्रापुत्र शत्रुघ्न अस्त्र-शस्त्रों की धारा से भरे हुए कौरव सेना के अक्षय समुद्र में प्रविष्ट हो रहे थे। कुरुपुत्र! उस समय आपके सैनिक युद्ध में उन्हें रोक न सके॥2-3॥ | mahabharat अध्याय 6.100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे बादल जल की धारा बरसाता है, उसी प्रकार वह बाणों की वर्षा कर रहा था। जैसे वराह रूपधारी भगवान विष्णु समुद्र में प्रविष्ट हुए थे, उसी प्रकार युद्ध में कुपित हुए सुभद्रापुत्र शत्रुघ्न अस्त्र-शस्त्रों की धारा से भरे हुए कौरव सेना के अक्षय समुद्र में प्रविष्ट हो रहे थे। कुरुपुत्र! उस समय आपके सैनिक युद्ध में उन्हें रोक न सके॥2-3॥
Just as a cloud pours down a torrent of water, similarly he was showering arrows. Just as Lord Vishnu in the form of Varaha entered the ocean, similarly Shatrughan, son of Subhadra, enraged in the war, was entering the inexhaustible sea of the Kaurava army filled with the flow of weapons. Son of Kuru! At that time your soldiers could not stop him in the battle.॥2-3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥