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mahabharat 6.100.17: हे भारत! आपकी सेना को जलाते समय हमने सदैव अभिमन्यु के धनुष को सूर्य के समान वृत्ताकार बनाते देखा है।   |   mahabharat अध्याय 6.100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.100.17 
मण्डलीकृतमेवास्य धनु: पश्याम भारत।
सूर्यमण्डलसंकाशं दहतस्तव वाहिनीम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! आपकी सेना को जलाते समय हमने सदैव अभिमन्यु के धनुष को सूर्य के समान वृत्ताकार बनाते देखा है।
 
O Bharata! While burning down your army we always saw Abhimanyu's bow forming a circle like the Sun.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)