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mahabharat 6.100.16: महान धनुर्धर अभिमन्यु, कृपाचार्य, द्रोणाचार्य, अश्वत्थामा, बृहद्बल और सिन्धुराज जयद्रथ को मोहित करके वह सब दिशाओं में सुन्दरता और शीघ्रता से चला गया।   |   mahabharat अध्याय 6.100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.100.16 
मोहयित्वा कृपं द्रोणं द्रौणिं च सबृहद्‍बलम्।
सैन्धवं च महेष्वासो व्यचरल्लघु सुष्ठु च॥ १६॥
 
 
अनुवाद
महान धनुर्धर अभिमन्यु, कृपाचार्य, द्रोणाचार्य, अश्वत्थामा, बृहद्बल और सिन्धुराज जयद्रथ को मोहित करके वह सब दिशाओं में सुन्दरता और शीघ्रता से चला गया।
 
Having fascinated the great archer Abhimanyu, Krupacharya, Dronacharya, Ashwatthama, Brihadbala and the king of Sindhus, Jayadratha, he moved in all directions gracefully and swiftly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)