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mahabharat 6.100.15: महामना सुभद्राकुमार अभिमन्यु अपने स्वर्णमय रथ पर सवार होकर युद्धभूमि में विचरण करते रहे; लोगों को उनकी गति में कोई अंतर नहीं दिखा ॥15॥   |   mahabharat अध्याय 6.100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.100.15 
तथैव चरतस्तस्य सौभद्रस्य महात्मन:।
रथेन काञ्चनाङ्गेन ददृशुर्नान्तरं जना:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
महामना सुभद्राकुमार अभिमन्यु अपने स्वर्णमय रथ पर सवार होकर युद्धभूमि में विचरण करते रहे; लोगों को उनकी गति में कोई अंतर नहीं दिखा ॥15॥
 
Mahamana Subhadrakumar Abhimanyu kept roaming in the battlefield in his golden chariot; People did not notice any difference in his speed. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)