Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.100.13: हे राजन! अभिमन्यु के धनुष का पिछला भाग सोने से जड़ा हुआ था। वह चारों दिशाओं में घूमता था और बादलों में चमकती बिजली के समान शोभायमान था।   |   mahabharat अध्याय 6.100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.100.13 
हेमपृष्ठं धनुश्चास्य ददृशे विचरद् दिश:।
तोयदेषु यथा राजन् राजमाना शतह्रदा॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! अभिमन्यु के धनुष का पिछला भाग सोने से जड़ा हुआ था। वह चारों दिशाओं में घूमता था और बादलों में चमकती बिजली के समान शोभायमान था।
 
O King! The back of Abhimanyu's bow was studded with gold. It moved in all directions and looked beautiful like lightning flashing in the clouds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)