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mahabharat 6.100.12: महाधनुर्धर पाण्डव अभिमन्यु समस्त शत्रुओं पर आक्रमण करते हुए वज्र धारण करने वाले इन्द्र के समान शोभायमान हो रहे थे ॥12॥   |   mahabharat अध्याय 6.100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.100.12 
प्रहरन् सर्वशत्रुभ्य: पाण्डवानां महारथ:।
अदृश्यत महेष्वास: सवज्र इव वासव:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
महाधनुर्धर पाण्डव अभिमन्यु समस्त शत्रुओं पर आक्रमण करते हुए वज्र धारण करने वाले इन्द्र के समान शोभायमान हो रहे थे ॥12॥
 
Attacking all the enemies, the great Pandava archer Abhimanyu was visible like Indra wielding the thunderbolt. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)