Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.100.11: महाराज! आपके सैनिक शत्रु संहारक अभिमन्यु के वेग का सामना न कर सके। जैसे काल से प्रेरित पतंगे प्रज्वलित अग्नि की गर्मी सहन नहीं कर पाते (वे उसमें झुलसकर मर जाते हैं), वही दशा आपके सैनिकों की हुई। | mahabharat अध्याय 6.100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महाराज! आपके सैनिक शत्रु संहारक अभिमन्यु के वेग का सामना न कर सके। जैसे काल से प्रेरित पतंगे प्रज्वलित अग्नि की गर्मी सहन नहीं कर पाते (वे उसमें झुलसकर मर जाते हैं), वही दशा आपके सैनिकों की हुई।
King! Your soldiers could not withstand the speed of enemy killer Abhimanyu. Just as the moths inspired by time cannot withstand the heat of a blazing fire (they get scorched and die in it), the same was the condition of your soldiers.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥