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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.100.10 
विद्राव्य सर्वसैन्यानि तावकानि नरोत्तम।
अभिमन्यु: स्थितो राजन् विधूमोऽग्निरिव ज्वलन्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! आपकी समस्त सेनाओं को भगा देने के पश्चात् अभिमन्यु धूमरहित अग्नि के समान चमक रहा था।
 
O best of men! After chasing away all your armies, Abhimanyu was shining like a smokeless fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)