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mahabharat 6.100.1: संजय कहते हैं: हे राजन! श्रेष्ठ रथी और महाप्रतापी अभिमन्यु ने गुलाबी रंग के उत्तम घोड़ों से जुते हुए रथ पर सवार होकर दुर्योधन की विशाल सेना पर आक्रमण किया।   |   mahabharat अध्याय 6.100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.100.1 
संजय उवाच
अभिमन्यू रथोदार: पिशङ्गैस्तुरगोत्तमै:।
अभिदुद्राव तेजस्वी दुर्योधनबलं महत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं: हे राजन! श्रेष्ठ रथी और महाप्रतापी अभिमन्यु ने गुलाबी रंग के उत्तम घोड़ों से जुते हुए रथ पर सवार होकर दुर्योधन की विशाल सेना पर आक्रमण किया।
 
Sanjaya says: O King! The best of charioteers and the most illustrious Abhimanyu attacked the large army of Duryodhana in a chariot drawn by the finest horses of pink colour.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)