श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 10: भारतवर्षमें युगोंके अनुसार मनुष्योंकी आयु तथा गुणोंका निरूपण  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.10.4 
पूर्वं कृतयुगं नाम ततस्त्रेतायुगं प्रभो।
संक्षेपाद् द्वापरस्याथ ततस्तिष्यं प्रवर्तते॥ ४॥
 
 
अनुवाद
प्रभु ! पहले सत्ययुग है, फिर त्रेतायुग आता है, उसके बाद द्वापर युग समाप्त होता है और फिर कलियुग शुरू होता है ॥4॥
 
Prabhu! First there is Satya Yuga, then Treta Yuga comes, after that Dvapara Yuga is over then Kali Yuga begins. ॥4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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