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mahabharat 6.10.13: हे भरतनन्दन! कलियुग में जन्म लेने वाले मनुष्य प्रायः अल्पज्ञ, क्रोधी, लोभी और असत्यभाषी होते हैं॥13॥   |   mahabharat अध्याय 6.10: भारतवर्षमें युगोंके अनुसार मनुष्योंकी आयु तथा गुणोंका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 10: भारतवर्षमें युगोंके अनुसार मनुष्योंकी आयु तथा गुणोंका निरूपण  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.10.13 
तेजसाल्पेन संयुक्ता: क्रोधना: पुरुषा नृप।
लुब्धा अनृतकाश्चैव तिष्ये जायन्ति भारत॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे भरतनन्दन! कलियुग में जन्म लेने वाले मनुष्य प्रायः अल्पज्ञ, क्रोधी, लोभी और असत्यभाषी होते हैं॥13॥
 
O Bharatanandan! People born in Kaliyug are generally less brilliant, short-tempered, greedy and untruthful. ॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)